धमतरी। शहर के महिमासागर वार्ड स्थित शीतला तालाब अचानक ‘मौत के कुंड’ में तब्दील हो गया, जब सोमवार सुबह हजारों मछलियां पानी की सतह पर मृत अवस्था में तैरती मिलीं। यह नजारा देख स्थानीय लोग दहशत में आ गए। सूचना मिलते ही नगर निगम और प्रशासन हरकत में आया, लेकिन तब तक तालाब के आसपास सड़ांध और बदबू ने हालात बिगाड़ दिए थे।
पहली नजर में मामला सिर्फ “ऑक्सीजन की कमी” का बताया जा रहा है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ऐसी स्थिति बनी कैसे? क्या तालाब की नियमित सफाई और जल गुणवत्ता की निगरानी की जा रही थी, या फिर लापरवाही ने इस घटना को जन्म दिया?
सिर्फ गर्मी या गंदगी की कहानी?
प्रशासन की प्रारंभिक जांच में पानी में ऑक्सीजन की कमी को कारण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि बढ़ती गर्मी और तालाब में जमा गंदगी के चलते यह स्थिति बनी। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब में लंबे समय से गंदा पानी, कचरा और नालों का प्रवाह हो रहा है, जिस पर कभी गंभीर ध्यान नहीं दिया गया।
यानी यह सिर्फ प्राकृतिक कारण नहीं, बल्कि व्यवस्था की अनदेखी का परिणाम भी हो सकता है।
सफाई शुरू, पर जवाबदेही तय कब?
नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर सफाई अभियान शुरू कर दिया है और मृत मछलियों को हटाने का काम जारी है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ “डैमेज कंट्रोल” है, या फिर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस योजना भी बनेगी?
बालोद में नीलगाय की मौत—जंगल से शहर तक खतरा
इधर बालोद जिले में भी एक चिंताजनक घटना सामने आई है। ग्राम खैरतराई में एक नीलगाय की तालाब में डूबने से मौत हो गई। यह नीलगाय जंगल से भटककर शहर के करीब पहुंच गई थी, जिसे एक दिन पहले वार्ड क्रमांक 01 के पास देखा गया था।
अगली सुबह उसका शव तालाब में मिला, जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवास पर खतरे को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
वन विभाग की कार्रवाई, लेकिन सवाल बरकरार
सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकलवाया गया। अधिकारियों के अनुसार पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। प्रारंभिक तौर पर इसे डूबने से मौत माना जा रहा है।
दो घटनाएं, एक बड़ा संकेत
धमतरी में मछलियों की सामूहिक मौत और बालोद में नीलगाय की असामान्य मृत्यु—दोनों घटनाएं एक ही ओर इशारा कर रही हैं:
जल स्रोतों की बिगड़ती स्थिति
पर्यावरणीय संतुलन पर खतरा
और प्रशासनिक निगरानी में संभावित कमी
अगर समय रहते इन संकेतों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में ऐसे “साइलेंट डिजास्टर” और भी बड़े रूप में सामने आ सकते हैं।

