कुरूद। किसानों की आय दोगुनी करने के दावे के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। कुरूद क्षेत्र की सहकारी समितियों में समर्थन मूल्य पर चना खरीदी तो हो गई, लेकिन उठाव नहीं होने से किसानों का करोड़ों रुपये का भुगतान अटक गया है। इससे किसान परेशान होकर बैंकों और समितियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार, कुरूद और कातलबोड सहकारी समितियों में अब तक करीब 9,400 क्विंटल चना की खरीदी की जा चुकी है। इसके एवज में किसानों का लगभग 5 करोड़ 48 लाख रुपये भुगतान लंबित है। उठाव नहीं होने के कारण भुगतान प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही है।
सरकार द्वारा दलहन-तिलहन फसलों की खरीदी सहकारी समितियों के माध्यम से कराने का निर्णय लिया गया है, जिसमें नेफेड को क्रय एजेंसी बनाया गया है। धमतरी जिले में भी इसी व्यवस्था के तहत खरीदी की जा रही है। हालांकि, शुरुआत में ग्रेडिंग के नाम पर अवैध वसूली की शिकायतों से किसान आक्रोशित हो गए थे। विरोध के बाद व्यवस्था में सुधार तो हुआ, लेकिन अब भुगतान में देरी नई समस्या बनकर सामने आई है।
कुरूद सोसायटी के प्रबंधक त्रिलोचन बांसकार ने बताया कि 23 मार्च से 13 अप्रैल तक 362 किसानों से 5526 क्विंटल चना खरीदा गया है, जिसकी राशि करीब 3 करोड़ 28 लाख रुपये है। उठाव नहीं होने के कारण यह भुगतान अटका हुआ है।
वहीं कातलबोड सोसायटी के प्रबंधक शिवनंदन बैस के अनुसार, उनकी समिति में 312 किसानों से 3897 क्विंटल चना की खरीदी की गई है, जिसकी कीमत 2 करोड़ 20 लाख रुपये से अधिक है। उठाव में देरी के चलते भंडारण, रखरखाव और सुखत की समस्या भी बढ़ती जा रही है।
इस संबंध में कॉपरेटिव बैंक कुरूद शाखा प्रबंधक टिकेंद्र बैस ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार 1 मार्च से खरीदी शुरू की गई थी, लेकिन एक माह बीतने के बाद भी किसानों के खातों में राशि जमा नहीं हो सकी है। मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी गई है और विपणन संघ को भी शीघ्र उठाव के लिए पत्र लिखा गया है।
किसानों ने शासन-प्रशासन से जल्द उठाव और भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि उन्हें आर्थिक संकट से राहत मिल सके।

