धमतरी। जिले के महात्मा गांधी वार्ड में वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू किया गया ‘सियान गुड़ी’ डे-केयर सेंटर बुजुर्गों के सम्मान, देखभाल और सक्रिय जीवन की दिशा में एक सराहनीय पहल बनकर सामने आया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शुरू इस पहल को प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
लोकार्पण कार्यक्रम में सांसद रूपकुमारी चौधरी, सांसद भोजराज नाग, विधायक ओंकार साहू, विधायक अंबिका मरकाम, महापौर रामू रोहरा और कलेक्टर अबिनाश मिश्रा सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने बुजुर्गों को समाज की धरोहर बताते हुए इस केंद्र को उनके लिए “सम्मान और सहारे का घर” बताया।
सुविधाओं से सुसज्जित, समग्र देखभाल का प्रयास:
‘सियान गुड़ी’ को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया गया है। यहां फिजियोथेरेपी, स्वास्थ्य परीक्षण, मनोरंजन कक्ष, परामर्श सेवा, पुस्तकालय, गेम जोन, विश्राम कक्ष और पौष्टिक भोजन जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके साथ ही डिजिटल लर्निंग कक्ष में बुजुर्गों को ऑनलाइन बैंकिंग और इंटरनेट उपयोग का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
यह व्यवस्था बुजुर्गों को न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने बल्कि मानसिक और सामाजिक रूप से सक्रिय बनाए रखने की दिशा में सकारात्मक पहल मानी जा रही है।
जमीनी असर पर रहेगी नजर:
हालांकि यह पहल उम्मीदों से भरी है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इन सुविधाओं का संचालन कितनी नियमितता और गुणवत्ता के साथ होता है। ऐसे केंद्रों में अक्सर शुरुआती उत्साह के बाद गतिविधियों की गति धीमी पड़ने की चुनौती देखी जाती है।
स्थानीय स्तर पर यह भी महत्वपूर्ण होगा कि अधिक से अधिक वरिष्ठ नागरिक इस केंद्र से जुड़ें और इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं।
डिजिटल पहल से जुड़ाव की नई उम्मीद:
डिजिटल लर्निंग कक्ष के जरिए बुजुर्गों को तकनीक से जोड़ने की कोशिश खास पहल के रूप में देखी जा रही है। यदि यह प्रशिक्षण निरंतर और व्यवहारिक रूप में दिया गया, तो यह बुजुर्गों को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
सकारात्मक शुरुआत, निरंतरता जरूरी:
‘सियान गुड़ी’ केवल एक डे-केयर सेंटर नहीं, बल्कि बुजुर्गों के लिए संवाद, सहयोग और सम्मान का मंच बनने की क्षमता रखता है। यदि प्रशासन और समाज दोनों मिलकर इसकी नियमित मॉनिटरिंग और संचालन सुनिश्चित करते हैं, तो यह मॉडल जिले के लिए एक उदाहरण बन सकता है।
कुल मिलाकर, पहल सकारात्मक है। अब नजर इस बात पर है कि यह प्रयास समय के साथ कितनी मजबूती से जमीन पर टिकता है और बुजुर्गों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला पाता है।


