धमतरी। महानदी के सीने से अवैध रेत खनन और उसके खुलेआम परिवहन को लेकर आखिरकार झुरानवागांव के ग्रामीणों का सब्र टूट गया। सोमवार को गांव की सीमा पर जो दृश्य देखने को मिला, उसने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी। ग्रामीणों—खासतौर पर महिलाओं—ने रेत से लदे हाइवा वाहनों को रोककर न सिर्फ विरोध दर्ज कराया, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
रेत से भरे हाइवा रोके, चालक फरार
ग्रामीणों ने बिना पिटपास चल रहे करीब 10 हाइवा वाहनों को गांव में घुसने से पहले ही रोक लिया। मौके पर हड़कंप मच गया और चालक वाहन छोड़कर फरार हो गए। बाद में प्रशासन ने 8 हाइवा वाहनों को जब्त किया, लेकिन सवाल यह है कि ये वाहन आखिर किसकी सरपरस्ती में बेरोकटोक चल रहे थे?

महिलाओं का अनोखा विरोध—अधिकारियों को चूड़ियां भेंट
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं का गुस्सा साफ झलक रहा था। खनिज निरीक्षक जीतेंद्र चंद्राकर के मौके पर पहुंचते ही ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया। तीखी बहस के बीच महिलाओं ने प्रतीकात्मक विरोध जताते हुए उन्हें चूड़ियां भेंट करने की कोशिश की।
महिलाओं का आरोप साफ था—“अगर कार्रवाई नहीं कर सकते, तो जिम्मेदारी छोड़ दें।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर अवैध खनन नहीं रुका तो वे सार्वजनिक रूप से अधिकारियों का विरोध तेज करेंगी।
मिलीभगत के आरोप, विभाग पर उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि खनिज विभाग की लापरवाही नहीं, बल्कि मिलीभगत के कारण रेत माफिया बेखौफ हैं। महानदी से लगातार हो रहे खनन से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है।
सड़क और पानी—दोहरी मार झेल रहे ग्रामीण
रेत से लदे भारी वाहनों की आवाजाही से सिर्फ पर्यावरण ही नहीं, बुनियादी सुविधाएं भी प्रभावित हो रही हैं। निर्माणाधीन कोलियारी-खरेंगा मार्ग पर इन वाहनों के गुजरने से सड़क के नीचे बिछी पेयजल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि “रेत माफिया की कमाई के चक्कर में गांव का पानी और सड़क दोनों बर्बाद हो रहे हैं।”
कार्रवाई या औपचारिकता?
खनिज अधिकारी हेमंत चेरपा का कहना है कि विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है और टीम ने मौके पर पहुंचकर वाहनों को जब्त किया। लेकिन यह सवाल अब भी बना हुआ है कि जब अवैध परिवहन लंबे समय से जारी था, तो कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई?
आक्रोश थमा, लेकिन चेतावनी बरकरार
प्रशासन के आश्वासन के बाद शाम तक स्थिति शांत हुई, लेकिन ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि अगर अवैध खनन पर जल्द रोक नहीं लगी, तो आंदोलन और उग्र होगा।
झुरानवागांव की यह घटना सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है, जहां संसाधनों की लूट के सामने नियम-कानून बेबस नजर आते हैं।

