धमतरी। मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब स्थानीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय हालातों के चलते कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे धमतरी जिले में गैस की भारी किल्लत पैदा हो गई है। स्थिति यह है कि शहर के बड़े होटलों से लेकर छोटे ठेला-गुमटी संचालकों तक को सिलेंडर के लिए जूझना पड़ रहा है और कई जगहों पर स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है।
कोयले और लकड़ी के भरोसे होटल
गैस संकट ने होटल व्यवसाय को वर्षों पीछे धकेल दिया है। होटल संचालक बताते हैं कि सिलेंडर नहीं मिलने के कारण अब लकड़ी और डीजल भट्ठियों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे न केवल भोजन तैयार करने में अधिक समय लग रहा है, बल्कि धुएं के कारण प्रदूषण भी बढ़ गया है। जहां पहले दो दिन में 50 किलो लकड़ी पर्याप्त होती थी, वहीं अब रोजाना सवा क्विंटल तक लकड़ी जलानी पड़ रही है।
महंगाई की दोहरी मार
गैस की कमी का सीधा असर बाजार पर भी पड़ा है। लकड़ी की कीमतों में तेजी आई है और इंडक्शन चूल्हों की मांग बढ़ने से उनके दाम भी दोगुने हो गए हैं। पहले 1500 रुपये में मिलने वाला इंडक्शन अब 3000 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं ‘एपीई’ जैसे इलेक्ट्रॉनिक चूल्हों की मांग तेजी से बढ़ी है, जो लकड़ी आधारित विकल्प के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
व्यापार पर संकट गहराया
जिला प्रशासन को भी भनक है कि वर्तमान में मांग के मुकाबले केवल 40 से 60 प्रतिशत तक ही गैस की आपूर्ति हो पा रही है। सिलेंडर बुकिंग के बाद 15 से 20 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। इस संकट के कारण जिले में 25 से अधिक ठेला-गुमटी बंद हो चुके हैं। प्रशासन ने कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी है, लेकिन यदि जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो स्थानीय व्यापार और अधिक प्रभावित हो सकता है।
