चंदौली। जनपद के कमालपुर क्षेत्र में स्थित हेतमपुर किला (भुलैनी कोट) इन दिनों लोगों की जिज्ञासा का केंद्र बनता जा रहा है। सैकड़ों वर्ष पुराने इस किले के खंडहर आज भी अपने भीतर इतिहास की अनकही कहानियां समेटे हुए हैं। दूर-दूर से लोग यहां पहुंचकर इस रहस्यमयी किले को करीब से देखने की कोशिश कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार कभी यह किला क्षेत्र की शान माना जाता था। विशाल दीवारें पुरानी ईंटों की संरचना और चारों ओर फैला सुनसान इलाका इस स्थान को अलग पहचान देता है। किले के कई हिस्से अब खंडहर में तब्दील हो चुके हैं, लेकिन बचे हुए अवशेष आज भी इसके भव्य अतीत की झलक दिखाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि किले से जुड़ी कई पुरानी कहानियां भी प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे “भुलैनी कोट” नाम से भी जानते हैं। मान्यता है कि पहले यहां आने वाले लोग रास्ता भूल जाया करते थे, जिसके चलते यह नाम पड़ा। हालांकि इन बातों की आधिकारिक पुष्टि नहीं है लेकिन यही रहस्य लोगों को यहां आने के लिए आकर्षित करता है।
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर इस किले के फोटो और वीडियो सामने आने के बाद युवाओं और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। शांत वातावरण पुरानी संरचना और प्राकृतिक सुंदरता के कारण यह जगह वीडियो और फोटोग्राफी के लिए भी पसंद की जा रही है।
हालांकि बढ़ती दिलचस्पी के बावजूद यह ऐतिहासिक स्थल अब भी उपेक्षा का शिकार है। किले के आसपास न तो कोई सूचना पट्ट है और न ही सुरक्षा की कोई व्यवस्था। कई स्थानों पर दीवारें जर्जर हो चुकी हैं जिससे दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इस किले के इतिहास को संजोकर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, तो यह न केवल क्षेत्र की पहचान बढ़ाएगा बल्कि चंदौली जिले को एक नई ऐतिहासिक पहचान भी दिला सकता है।
खंडहर में बदल चुका यह किला आज भी अपने अतीत की कहानी कहने को तैयार है। बस जरूरत है इसे सुनने और संजोने की, ताकि यह रहस्यमयी धरोहर आने वाले समय में लोगों की जिज्ञासा और इतिहास दोनों को जीवित रख सके।
