संसद में ‘किताब’ पर संग्राम’ राहुल गांधी बोले- ‘सरकार कहती है किताब नहीं है, मैं PM को भेंट करूंगा’; बिट्टू से हुई तीखी ‘गद्दार’ जंग

Versha Chouhan
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नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान बुधवार को उस समय हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पूर्व आर्मी चीफ जनरल एम.एम. नरवणे की विवादित किताब लेकर सदन पहुंचे। पिछले दो दिनों से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस बात पर ठनी हुई थी कि क्या एक ‘अप्रकाशित’ किताब के अंश संसद में पढ़े जा सकते हैं। राहुल गांधी ने न केवल किताब लहराई, बल्कि केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के साथ उनकी जुबानी जंग भी चरम पर पहुंच गई।

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“यह रही किताब, पीएम को दूंगा”

राहुल गांधी ने संसद परिसर में पत्रकारों को किताब दिखाते हुए कहा कि सरकार और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दावा कर रहे हैं कि ऐसी कोई किताब अस्तित्व में ही नहीं है। राहुल ने कहा:

“सरकार कह रही है कि यह किताब छपी ही नहीं है, लेकिन यह मेरे हाथ में है। अगर आज प्रधानमंत्री सदन में आते हैं, तो मैं उन्हें यह किताब खुद भेंट करूंगा। यह किसी विदेशी लेखक की नहीं, हमारे पूर्व सेना प्रमुख की सच्चाई है।”

क्या है किताब का विवाद?

राहुल गांधी का आरोप है कि जनरल नरवणे ने अपनी किताब में 2020 के लद्दाख संकट का जिक्र करते हुए लिखा है कि जब चीनी टैंक भारतीय सीमा के करीब आ रहे थे, तब प्रधानमंत्री ने जिम्मेदारी लेने के बजाय सेना प्रमुख से कहा था— “जो उचित समझो, वो करो।” राहुल के मुताबिक, यह दर्शाता है कि संकट के समय राजनीतिक नेतृत्व ने सेना को अकेला छोड़ दिया था।

राहुल बनाम बिट्टू: ‘गद्दार’ और ‘देश का दुश्मन’

संसद के मकर द्वार के पास उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू आमने-सामने आ गए।

  • राहुल का हमला: राहुल ने बिट्टू की ओर इशारा करते हुए अपने साथियों से कहा, “देखो, एक गद्दार आ रहा है।” गौरतलब है कि बिट्टू कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं।

  • बिट्टू का पलटवार: जवाब में रवनीत सिंह बिट्टू ने राहुल गांधी को “देश का दुश्मन” करार दिया। बिट्टू ने हाथ मिलाने से इनकार करते हुए कहा कि जो लोग देश की सुरक्षा पर राजनीति करते हैं, वे असली दुश्मन हैं।

रक्षा मंत्री की दलील

इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में स्पष्ट किया था कि किसी भी पूर्व सैन्य अधिकारी की किताब को प्रकाशन से पहले रक्षा मंत्रालय की मंजूरी (Review) की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि जो किताब अभी आधिकारिक तौर पर जारी ही नहीं हुई, उसके तथ्यों को सदन की कार्यवाही का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता।

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