वाड्रफनगर में Anti Snare Walk कार्यशाला का आयोजन, ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण के लिए किया गया जागरूक

Versha Chouhan
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छत्तीसगढ़ के वाड्रफनगर में वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल के तहत Anti Snare Walk कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला वन मंडलाधिकारी आलोक बाजपेई के निर्देश पर आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य जंगलों में अवैध रूप से लगाए जाने वाले फंदों (स्नेयर) से वन्यजीवों की हो रही लगातार मौतों को रोकना और ग्रामीणों को इसके प्रति जागरूक करना रहा।

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कार्यशाला में आसपास के गांवों से भारी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान उन्हें बताया गया कि जंगलों में लगाए जाने वाले तार, रस्सी या लोहे के फंदे किस प्रकार जंगली जानवरों के लिए जानलेवा साबित होते हैं। विशेषज्ञों ने समझाया कि शिकारियों द्वारा लगाए गए ये फंदे केवल एक प्रजाति तक सीमित नहीं रहते, बल्कि हिरण, जंगली सूअर, तेंदुआ सहित कई संरक्षित वन्यजीव इनकी चपेट में आ जाते हैं।

कार्यशाला में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने ग्रामीणों को Anti Snare Walk के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसमें जंगल में भ्रमण के दौरान फंदों की पहचान, उन्हें सुरक्षित तरीके से हटाने की प्रक्रिया और इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को देने के तरीकों पर प्रशिक्षण दिया गया। ग्रामीणों को यह भी बताया गया कि फंदा लगाना और वन्यजीवों का शिकार करना कानूनन गंभीर अपराध है, जिसके लिए सख्त सजा का प्रावधान है।

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इस अवसर पर वन विभाग छत्तीसगढ़ के धमनी, वाड्रफनगर और रघुनाथ नगर रेंज के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी रेंज के वन अमले ने मिलकर ग्रामीणों के साथ संवाद किया और उनसे अपील की कि वे वन्यजीवों की सुरक्षा में भागीदार बनें। अधिकारियों ने कहा कि जंगल और वन्यजीव स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए बेहद जरूरी हैं और इनका संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हाल के समय में फंदों में फंसकर वन्यजीवों की मौत की घटनाएं सामने आई थीं, जिसे देखते हुए इस तरह की कार्यशाला आयोजित करना आवश्यक हो गया था। Anti Snare Walk के माध्यम से न केवल फंदों को हटाया जाएगा, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए गांव स्तर पर सतर्कता भी बढ़ाई जाएगी।

कार्यशाला के अंत में ग्रामीणों ने वन्यजीव संरक्षण में सहयोग करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग को देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में सकारात्मक माहौल देखा गया और इसे वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम माना जा रहा है।

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