By CG Desk
वाड्रफनगर – शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल नल जल योजना की जमीनी हकीकत वाड्रफनगर क्षेत्र में सवालों के घेरे में है। ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना अब तक अपने लक्ष्य से काफी दूर नजर आ रही है। योजना के तहत गांव-गांव पाइपलाइन बिछाकर नल कनेक्शन दिए जाने थे, ताकि ग्रामीणों को हैंडपंप, कुएं और दूर-दराज के जलस्रोतों पर निर्भर न रहना पड़े, लेकिन हालात इसके बिल्कुल उलट हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार संबंधित विकासखंड की कुल 109 ग्राम पंचायतों में से अब तक केवल 13 गांवों में ही नल जल योजना का कार्य पूर्ण हो सका है। शेष गांवों में या तो काम शुरू ही नहीं हो पाया है, या फिर अधूरा निर्माण कर कार्य छोड़ दिया गया है। कहीं पाइपलाइन बिछा दी गई है लेकिन पानी की टंकी नहीं बनी, तो कहीं टंकी तो खड़ी है पर नलों तक पानी पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं हो सकी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार संबंधित विकासखंड की कुल 109 ग्राम पंचायतों में से अब तक केवल 13 गांवों में ही नल जल योजना का कार्य पूर्ण हो सका है। शेष गांवों में या तो काम शुरू ही नहीं हो पाया है, या फिर अधूरा निर्माण कर कार्य छोड़ दिया गया है। कहीं पाइपलाइन बिछा दी गई है लेकिन पानी की टंकी नहीं बनी, तो कहीं टंकी तो खड़ी है पर नलों तक पानी पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं हो सकी।

ग्रामीणों का कहना है कि योजना की शुरुआत हुए कई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज भी उन्हें शुद्ध पेयजल के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। गर्मी का मौसम नजदीक आते ही जल संकट की चिंता और बढ़ गई है। जलस्तर गिरने के कारण हैंडपंप भी जवाब देने लगे हैं, जिससे ग्रामीण खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
कई गांवों में महीनों से पाइपलाइन खुली पड़ी है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। अधूरे निर्माण को लेकर सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप भी लग रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण योजना कागजों में तो पूरी दिखाई जा रही है, लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही है।

ग्रामीणों का कहना है कि योजना की शुरुआत हुए कई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज भी उन्हें शुद्ध पेयजल के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। गर्मी का मौसम नजदीक आते ही जल संकट की चिंता और बढ़ गई है। जलस्तर गिरने के कारण हैंडपंप भी जवाब देने लगे हैं, जिससे ग्रामीण खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
कई गांवों में महीनों से पाइपलाइन खुली पड़ी है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। अधूरे निर्माण को लेकर सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप भी लग रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण योजना कागजों में तो पूरी दिखाई जा रही है, लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही है।

ग्रामीणों ने बताया कि कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। न तो काम की गति बढ़ाई गई और न ही गुणवत्ता पर ध्यान दिया गया। कुछ स्थानों पर घटिया सामग्री के इस्तेमाल की शिकायतें भी सामने आई हैं।
यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले गर्मी के महीनों में ग्रामीणों को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है। महिलाओं और बच्चों को पानी की तलाश में लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे उनके स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

ग्रामीणों ने बताया कि कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। न तो काम की गति बढ़ाई गई और न ही गुणवत्ता पर ध्यान दिया गया। कुछ स्थानों पर घटिया सामग्री के इस्तेमाल की शिकायतें भी सामने आई हैं।
यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले गर्मी के महीनों में ग्रामीणों को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है। महिलाओं और बच्चों को पानी की तलाश में लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे उनके स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि नल जल योजना के अधूरे कार्यों को शीघ्र पूरा कराया जाए, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाए तथा योजना की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि यह महत्वाकांक्षी योजना वास्तव में अपने उद्देश्य को पूरा कर सके।

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि नल जल योजना के अधूरे कार्यों को शीघ्र पूरा कराया जाए, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाए तथा योजना की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि यह महत्वाकांक्षी योजना वास्तव में अपने उद्देश्य को पूरा कर सके।

