लोकसभा में गूँजा ‘मीडिएशन काउंसिल’ का मुद्दा’ रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल के सवाल पर सरकार ने पेश किया भविष्य का रोडमैप

Versha Chouhan
3 Min Read

नई दिल्ली/रायपुर | 13 फरवरी, 2026: अदालतों में लंबित करोड़ों मामलों के बोझ को कम करने और आम आदमी को सस्ता व सुलभ न्याय दिलाने की दिशा में केंद्र सरकार ने ‘मीडिएशन’ (मध्यस्थता) को अपनी प्राथमिकता बताया है। लोकसभा में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा पूछे गए एक महत्वपूर्ण सवाल के जवाब में सरकार ने मीडिएशन काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) के पूर्ण क्रियान्वयन और इसके ऑपरेशनल रोडमैप की जानकारी साझा की।

Bhilwara accident : शादी के घर से एसिड ले गए मजदूर, शराब समझकर पी लिया… 3 महिलाओं समेत 4 की मौत, एक की हालत गंभीर

मुख्य बिंदु:

  • सांसद की पहल: बृजमोहन अग्रवाल ने वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) को मजबूत करने की वकालत की।

  • बड़ा सवाल: मीडिएशन काउंसिल के गठन में देरी और इसके पूर्णतः कार्यात्मक होने की समय-सीमा पर पूछा सवाल।

  • सरकार का जवाब: कानून मंत्रालय ने बताया कि काउंसिल के गठन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है।

  • लक्ष्य: अदालती हस्तक्षेप के बिना आपसी सहमति से विवादों का निपटारा सुनिश्चित करना।

न्याय प्रक्रिया में ‘मील का पत्थर’ बनेगा मीडिएशन

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सदन में तर्क दिया कि जैसे-जैसे देश विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है, न्यायिक सुगमता (Ease of Justice) अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मीडिएशन एक्ट पारित होने के बाद अब समय आ गया है कि काउंसिल को पूरी तरह से सक्रिय किया जाए ताकि छोटे और मध्यम स्तर के विवादों को कोर्ट पहुँचने से पहले ही सुलझाया जा सके। इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि न्यायपालिका पर दबाव भी कम होगा।

सरकार ने बताया ‘एक्शन प्लान’

विधि एवं न्याय मंत्रालय (Ministry of Law and Justice) की ओर से दिए गए जवाब में सरकार ने बताया कि:

  1. MCI का गठन: मीडिएशन काउंसिल के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है।

  2. प्रशिक्षण: देश भर में कुशल ‘मीडिएटर्स’ (मध्यस्थों) का एक बड़ा पैनल तैयार किया जा रहा है, जिन्हें पेशेवर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

  3. डिजिटलाइजेशन: मध्यस्थता की प्रक्रिया को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है ताकि सुदूर क्षेत्रों के लोग भी इसका लाभ ले सकें।

रायपुर और छत्तीसगढ़ को भी होगा लाभ

सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य, जहाँ जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों में विवादों को पारंपरिक रूप से आपसी सहमति से सुलझाने की संस्कृति रही है, वहाँ यह काउंसिल और भी अधिक प्रभावी साबित होगी। उन्होंने मांग की कि छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों में भी क्षेत्रीय मध्यस्थता केंद्र (Regional Mediation Centres) खोले जाने चाहिए।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page