रूखा भोजन, अधूरी सैलरी और फर्जी आंकड़े—परख वृद्धाश्रम की चौंकाने वाली कहानी

Admin
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वाड्रफनगर – के रजखेता गांव में संचालित परख वृद्धाश्रम द्वारा शासन की योजनाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं, और समाज के सबसे कमजोर वर्ग—बुजुर्गों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर भी चिंता गहराती जा रही है


प्राप्त जानकारी के अनुसार, परख वृद्धाश्रम को शासन द्वारा 50 वृद्धजनों के भरण-पोषण के लिए नियमित अनुदान दिया जाता है। नियमों के मुताबिक, इस राशि का उपयोग वृद्धों के भोजन, स्वास्थ्य, आवास और अन्य मूलभूत सुविधाओं पर किया जाना चाहिए। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग बताई जा रही है। आरोप है कि वृद्धाश्रम में वर्तमान में केवल 10 वृद्ध ही रह रहे हैं, जबकि कागजों में 50 वृद्धों की संख्या दर्शाकर शासन से पूरी रकम ली जा रही है। यह मामला सीधे तौर पर सरकारी धन के दुरुपयोग और फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है।
वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों की स्थिति भी बेहद दयनीय बताई जा रही है। स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार, शासन के दिशा-निर्देशों में जहां वृद्धों को पौष्टिक, संतुलित और नियमित भोजन देने का प्रावधान है, वहीं यहां उन्हें रूखा-सूखा और निम्न गुणवत्ता वाला भोजन दिया जा रहा है। कई बार भोजन की मात्रा भी पर्याप्त नहीं होती, जिससे बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी हुई है।


मामला यहीं तक सीमित नहीं है। वृद्धाश्रम में कार्यरत कर्मचारियों ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें समय पर वेतन नहीं दिया जाता, जिससे वे आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। कई कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि महीनों तक सैलरी लंबित रहती है और जब वे इसका विरोध करते हैं, तो उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। इससे साफ है कि न केवल वृद्ध, बल्कि कर्मचारी भी शोषण का शिकार हो रहे हैं।


स्थानीय ग्रामीणों और समाजसेवियों का कहना है कि परख वृद्धाश्रम लंबे समय से संदेह के घेरे में रहा है, लेकिन अब सामने आई जानकारियों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।


इस पूरे मामले में अब तक वृद्धाश्रम संचालक की ओर से कोई स्पष्ट या आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
फिलहाल यह मामला न केवल शासन की योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि समाज में बुजुर्गों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े एक गंभीर सामाजिक मुद्दे को भी उजागर करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है।

By-CG Desk

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