By – Kuleshwar Kuswaha
बलरामपुर : मुख्यमंत्री कन्या विवाह कार्यक्रम में प्रशासनिक लापरवाही को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिली। हाई स्कूल मैदान में आयोजित भव्य मुख्यमंत्री कन्या विवाह कार्यक्रम के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन पर मनमानी और उपेक्षा का आरोप लगाया, जिससे कार्यक्रम स्थल पर काफी देर तक गहमा-गहमी का माहौल बना रहा।

आमंत्रण कार्ड में नाम न होने से भड़के जनप्रतिनिधि ..
कार्यक्रम में उस समय विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई जब स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने आमंत्रण कार्ड में अपने नाम न होने पर नाराजगी जताई। जनप्रतिनिधियों का कहना था कि इतने बड़े शासकीय कार्यक्रम में उनकी अनदेखी करना जिला प्रशासन की तानाशाही और लापरवाही को दर्शाता है।

मंच छोड़ दर्शक दीर्घा में बैठे जनप्रतिनिधि …
नाराजगी के चलते भाजपा जिला अध्यक्ष, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष, नगरपालिका उपाध्यक्ष सहित कई जनप्रतिनिधि मंच से उतरकर दर्शक दीर्घा में बैठ गए। यह दृश्य कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गया।
विधायक उदेश्वरी पैकरा ने जनप्रतिनिधियों का दिया साथ …
कार्यक्रम में मौजूद विधायक उदेश्वरी पैकरा ने भी जनप्रतिनिधियों के समर्थन में मंच छोड़कर उनके साथ दर्शक दीर्घा में बैठना उचित समझा। विधायक के इस कदम से प्रशासनिक अमले पर दबाव और बढ़ गया।
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महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी मनाने में जुटे …
स्थिति बिगड़ती देख महिला एवं बाल विकास विभाग के जिम्मेदार अधिकारी जनप्रतिनिधियों को मनाने में जुट गए। अधिकारियों द्वारा लगातार संवाद कर मामले को शांत करने का प्रयास किया गया।
अधिकारियों ने मानी गलती, जनप्रतिनिधियों को किया मंचाशीन ..
काफी देर चली बातचीत के बाद अधिकारियों ने अपनी गलती स्वीकार की। इसके बाद जनप्रतिनिधियों को सम्मानपूर्वक मंच पर आमंत्रित किया गया, तब जाकर कार्यक्रम की औपचारिक कार्यवाही आगे बढ़ सकी।
देर तक बना रहा गहमा-गहमी का माहौल ..
हालांकि मामला सुलझ गया, लेकिन इस घटनाक्रम के चलते काफी देर तक कार्यक्रम स्थल पर तनावपूर्ण और गहमा-गहमी का माहौल बना रहा।
150 जोड़ों का हुआ विवाह
उल्लेखनीय है कि हाई स्कूल मैदान में आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह कार्यक्रम में लगभग 150 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया जा रहा है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री वर्चुअल माध्यम से नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देंगे।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि ऐसे सार्वजनिक और संवेदनशील कार्यक्रमों में समन्वय और सम्मान की भावना आवश्यक है, जिसकी अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

