मणिपुर में लोकतंत्र की वापसी’ युमनाम खेमचंद बने 13वें मुख्यमंत्री, 356 दिन बाद हटा राष्ट्रपति शासन; कुकी और नगा समुदाय से भी बने डिप्टी CM

Versha Chouhan
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इम्फाल: मणिपुर में पिछले करीब एक साल से जारी राजनीतिक अनिश्चितता और राष्ट्रपति शासन का दौर अब खत्म हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता युमनाम खेमचंद सिंह ने बुधवार को मणिपुर के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने शाम को आयोजित एक गरिमामय समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

सामाजिक संतुलन: दो डिप्टी CM का फॉर्मूला

राज्य में जातीय संघर्ष के बाद विश्वास बहाली के लिए भाजपा ने एक बड़ा कदम उठाया है। खेमचंद (मैतेई समुदाय) के साथ दो उप-मुख्यमंत्री बनाए गए हैं:

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  • नेमचा किपजेन (डिप्टी CM): कुकी समुदाय से आने वाली नेमचा किपजेन राज्य की पहली महिला डिप्टी CM बनी हैं।

  • लोसी दिखो (डिप्टी CM): नगा समुदाय (NPF) के कद्दावर नेता लोसी दिखो को भी उप-मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। इस त्रिकोणीय सत्ता संतुलन का उद्देश्य मैतेई, कुकी और नगा समुदायों के बीच आपसी सद्भाव को फिर से स्थापित करना है।

356 दिन बाद हटा राष्ट्रपति शासन

मणिपुर में 13 फरवरी 2025 को हिंसा और प्रशासनिक विफलता के कारण राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) लगाया गया था। पूरे 356 दिनों के अंतराल के बाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार (4 फरवरी 2026) सुबह राष्ट्रपति शासन हटाने की अधिसूचना जारी की, जिसके बाद नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हुआ।

कौन हैं युमनाम खेमचंद?

  • अनुभव: 62 वर्षीय खेमचंद सिंगजामेई सीट से दो बार के विधायक हैं।

  • पिछला कार्यकाल: वे 2017 से 2022 तक मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष (Speaker) रह चुके हैं और बीरेन सिंह सरकार में मंत्री भी रहे हैं।

  • छवि: उन्हें एक उदारवादी नेता और ‘ब्लैक बेल्ट’ ताइक्वांडो खिलाड़ी के रूप में जाना जाता है। उनकी छवि कुकी और मैतेई दोनों समुदायों के बीच स्वीकार्य मानी जाती है, जो शांति बहाली के लिए बेहद जरूरी है।

नई सरकार की प्राथमिकताएं

शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री खेमचंद ने कहा कि उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता “शांति और सद्भाव” है। उन्होंने कहा कि विस्थापित लोगों का पुनर्वास और समुदायों के बीच अविश्वास की खाई को पाटना ही उनका पहला लक्ष्य होगा।

महत्वपूर्ण तथ्य: पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने स्वयं खेमचंद के नाम का प्रस्ताव विधायक दल की बैठक में रखा था, जिससे पार्टी के भीतर एकजुटता का संदेश दिया गया।

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