बलरामपुर बस स्टैंड में स्वच्छता व्यवस्था फेल: पानी नहीं, गंदगी का अंबार; 16 लाख का आकांक्षी शौचालय बंद

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By- Shailendra Singh Baghel

बलरामपुर -छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिले बलरामपुर में स्वच्छता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर केंद्र और राज्य सरकार स्वच्छता अभियान, हर घर शौचालय और सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की बात कर रही हैं, वहीं जिला मुख्यालय के बस स्टैंड की स्थिति इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। यहां यात्रियों के लिए बने महिला और पुरुष प्रसाधन में पानी की सुविधा नहीं है और गंदगी का अंबार लगा हुआ है।

क्या है पूरा मामला

* स्थान – जिला मुख्यालय बलरामपुर का मुख्य बस स्टैंड

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By- Shailendra Singh Baghelबलरामपुर -छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिले बलरामपुर में स्वच्छता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर केंद्र और राज्य सरकार स्वच्छता अभियान, हर घर शौचालय और सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की बात कर रही हैं, वहीं जिला मुख्यालय के बस स्टैंड की स्थिति इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। यहां यात्रियों के लिए बने महिला और पुरुष प्रसाधन में पानी की सुविधा नहीं है और गंदगी का अंबार लगा हुआ है।क्या है पूरा मामला * समस्या – महिला और पुरुष शौचालयों में पानी नहीं, सफाई नदारद  * सबसे ज्यादा परेशानी – महिला यात्रियों को *  16 लाख की लागत – आकांक्षी शौचालय निर्माण, लेकिन अब तक बंदयात्रियों को हो रही भारी परेशानीबलरामपुर जिला मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और झारखंड की सीमा से लगा हुआ है, जिससे यहां रोजाना बड़ी संख्या में यात्री पहुंचते हैं। लेकिन बस स्टैंड में बुनियादी सुविधा यानी शौचालय की हालत बेहद खराब है। महिला प्रसाधन और पुरुष शौचालय में पानी की आपूर्ति बंद है। साफ-सफाई नहीं होने के कारण बाथरूम में बदबू और गंदगी फैली हुई है। स्थिति ऐसी है कि यात्री शौचालय के भीतर जाना भी नहीं चाहते। स्थानीय दुकानदारों और यात्रियों का कहना है कि मजबूरी में लोगों को खुले में जाना पड़ रहा है, जो स्वच्छता अभियान की भावना के विपरीत है। खासकर महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।16 लाख का आकांक्षी शौचालय, लेकिन ताला लटकाबस स्टैंड परिसर में करीब 16 लाख रुपये की लागत से “आकांक्षी शौचालय” का निर्माण कार्य नवंबर 2024 में स्वीकृत हुआ था। नियमानुसार यह कार्य छह माह के भीतर पूरा होना था। लेकिन तय समय सीमा बीतने के बाद भी शौचालय आम जनता के लिए शुरू नहीं किया गया है। इतना ही नहीं, निर्माण स्थल पर कोई सूचना बोर्ड भी नहीं लगाया गया है, जिसमें लागत, कार्य अवधि और ठेकेदार की जानकारी दर्ज हो। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शौचालय का उद्घाटन किसी बड़े नेता या मंत्री से करवाने के इंतजार में उसे बंद रखा गया है, जबकि आम जनता परेशान है।प्रशासन का क्या कहना है?नगरपालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) ने आकांक्षी शौचालय को जल्द शुरू करने की बात कही है। हालांकि निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड नहीं लगाए जाने को लेकर उनके पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। नियमों के अनुसार, किसी भी निर्माण कार्य से पहले सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।अब सवाल यह है…* बस स्टैंड के मौजूदा शौचालयों में पानी और सफाई की व्यवस्था कब सुधरेगी? * 16 लाख की लागत से बना आकांक्षी शौचालय कब तक आम जनता के लिए खुलेगा? * क्या स्वच्छता अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा?फिलहाल बस स्टैंड में रोजाना सैकड़ों यात्रियों को बुनियादी सुविधा के लिए भटकना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि नगरपालिका इस मुद्दे पर कितनी जल्दी ठोस कदम उठाती है।

 * समस्या – महिला और पुरुष शौचालयों में पानी नहीं, सफाई नदारद
 * सबसे ज्यादा परेशानी – महिला यात्रियों को
*  16 लाख की लागत – आकांक्षी शौचालय निर्माण, लेकिन अब तक बंद

यात्रियों को हो रही भारी परेशानी

बलरामपुर जिला मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और झारखंड की सीमा से लगा हुआ है, जिससे यहां रोजाना बड़ी संख्या में यात्री पहुंचते हैं। लेकिन बस स्टैंड में बुनियादी सुविधा यानी शौचालय की हालत बेहद खराब है।
महिला प्रसाधन और पुरुष शौचालय में पानी की आपूर्ति बंद है। साफ-सफाई नहीं होने के कारण बाथरूम में बदबू और गंदगी फैली हुई है। स्थिति ऐसी है कि यात्री शौचालय के भीतर जाना भी नहीं चाहते।
स्थानीय दुकानदारों और यात्रियों का कहना है कि मजबूरी में लोगों को खुले में जाना पड़ रहा है, जो स्वच्छता अभियान की भावना के विपरीत है। खासकर महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

16 लाख का आकांक्षी शौचालय, लेकिन ताला लटका

बस स्टैंड परिसर में करीब 16 लाख रुपये की लागत से “आकांक्षी शौचालय” का निर्माण कार्य नवंबर 2024 में स्वीकृत हुआ था। नियमानुसार यह कार्य छह माह के भीतर पूरा होना था।
लेकिन तय समय सीमा बीतने के बाद भी शौचालय आम जनता के लिए शुरू नहीं किया गया है। इतना ही नहीं, निर्माण स्थल पर कोई सूचना बोर्ड भी नहीं लगाया गया है, जिसमें लागत, कार्य अवधि और ठेकेदार की जानकारी दर्ज हो।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शौचालय का उद्घाटन किसी बड़े नेता या मंत्री से करवाने के इंतजार में उसे बंद रखा गया है, जबकि आम जनता परेशान है।

प्रशासन का क्या कहना है?

नगरपालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) ने आकांक्षी शौचालय को जल्द शुरू करने की बात कही है। हालांकि निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड नहीं लगाए जाने को लेकर उनके पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।
नियमों के अनुसार, किसी भी निर्माण कार्य से पहले सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

अब सवाल यह है…

* बस स्टैंड के मौजूदा शौचालयों में पानी और सफाई की व्यवस्था कब सुधरेगी?
* 16 लाख की लागत से बना आकांक्षी शौचालय कब तक आम जनता के लिए खुलेगा?
* क्या स्वच्छता अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा?

फिलहाल बस स्टैंड में रोजाना सैकड़ों यात्रियों को बुनियादी सुविधा के लिए भटकना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि नगरपालिका इस मुद्दे पर कितनी जल्दी ठोस कदम उठाती है।

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