By-Shailendra singh Baghel
बलरामपुर -जिला मुख्यालय से महज पाँच किलोमीटर दूरी पर भेलवाडीह गांव में संचालित पहाड़ी कोरवा बालक क्षात्रावास के बच्चे हॉस्टल की अब्यवस्था और पुराने अधीक्षक को वापस रखने की मांग को लेकर पैदल ही कलेक्टर से मिलने के लिए निकल पड़े जिनको रास्ते मे ही रोककर अधिकारियो द्वारा समझाइस और जांच के बाद कार्यवाही का भरोसा दिया गया जिसके बाद सभी बच्चे वापस क्षात्रावास के लिए लौट गए ।

आपको बता दे कि भेलवाडीह गांव में संचालित पहाड़ी कोरवा क्षात्रावास में पूर्व में शिक्षक उमाशंकर सोनवानी को अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था लेकिन उनकी लगातार शिकायत और लापरवाही के कारण हाल फिलहाल में ही उनको अधीक्षक के पद से हटा दिया गया था ,,जानकारी के मुताबिक जिस समय उमाशंकर सोनवानी अधीक्षक थे उसी दौरान हॉस्टल से बच्चे बिना कोई सूचना के अपने घर भाग गए थे और शिकायत के बाद सोनवानी को अधीक्षक के पद से पृथक कर दिया गया गया था ,,जिसके बाद स्कूल की प्रभारी प्राचार्य सुफला टोप्पो को हॉस्टल अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था ,,,लेकिन आज क्षात्रावास में पढ़ने वाले बच्चे पाँच किलोमीटर की पैदल दूरी तय करके हॉस्टल में अब्यवस्था और पुराने अधीक्षक को वापस लाने की मांग को लेकर कलेक्टर से मिलने के लिए निकल पड़े थे जिसकी सूचना मिलने पर प्रशासन द्वारा उनकी शिकायत की जांच के बाद कार्यवाही का भरोसा दिया गया ,,जिसके बाद सभी बच्चे वापस क्षात्रावास चले गए ,,,लेकिन सवाल यही है कि जिला मुख्यालय से लगे हुये क्षत्रावास जहाँ पर दूरदराज से बच्चे आकर पढ़ाई करते है वहां के बच्चों को सड़क पर क्यों उतरना पड़ा क्या उनको सामने रखकर पुराने अधीक्षक के द्वारा उकसाकर उन्हें सड़क पर उतरने के लिए इमोशनली ब्लैक मेल किया गया या फिर नई अधीक्षिका के द्वारा बच्चों को वाकई परेशान किया जा रहा है ,,हालाँकि इन दोनों पहलुओं में जांच जरूरी है अब जाँच कैसे होती ये देखने वाली बात रहेगी ।


